My name is Waseem, from Karachi, my age is 24 year, hight 5 ft 8 inch,
my profession “auditor”.Basically main sex lover hn lakin life
main sirf aik bar he sex ka chance mila hai. Aor usi chance ki story
main aj app ko sunay
jar aha hn Ye 10 Oct 2013 ki baat hai main branch audit (Lahore) se
wapis Karachi aa raha
tha train main, meri seat k opposite wali seat pe aik family bthi hui
thi, un main aik
larki, anti 40 year old Anti aor aik larka tha, woh loog Wazirabad se
bethy thay,aor meri
wali side pe aik buri amm aor un k husband thay. >>>>Click Here
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Here TO Fuck me<< main jesay he Lahore se
betha larki ny mujy
ghoorna shoor kr diya, woh aik normal c larki thi phly to main ney
notice nai diya aor apni
audit ki working paper files khool kr read krni shoor ki di, thori dair
baad main reading se
boor ho geya, aor files band kr k bahar dekna shoor kr diya, es bech woh
larki mujy dekhy ja
rahi thi, meri us pe hat rahi thi k apni mama aor Bahi k samny kesy mujy
ghoory ja rahi hai.
Kahir safar esay he chalta raha k Faisalabad aa geya,>>>>Click Here
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Here TO Fuck me<< Faisalabad pe
train 30 mint rukti hai,
main apni seat se utha aor coach k gate pe ja kr khara ho geya, thori
dair k baad wahi larki
aor anti bath room main janay k liye aai jesay he woh donu mera pass se
gujar kr bath mein
janay lagi tu anit ka dupata aagay se phisal geya aor un k tight booobs
safe nazar aanay
lage, kia kamal k booobs thay main moun se oohhh ki awaz nikal gai jesy anti ne sun liya aor
meri tarif dekh kr thora se muskar di.
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Wednesday, September 17, 2014
Bachi ki jabardast chudai
Hi. Mera naam Shafiq ha or ma Lahore ma rehta hon. Actually ma kisi or city se hon or Lahore perne k liye aya hon. Aaj jo ma app ko story sunane jar aha hon ye 5 month pehle ki baat ha. 1 raat ma Lahore ma bahir gumne k liye nikla apne saare dosto k sath or different places par gaie wahan 1 Bachi thi jo k baar baar
>>>>Click Here TO Fuck me<<< >>>>Click Here TO Fuck me<< >>>>Click Here TO Fuck me<<<< hamare group ki taraf daikh rahi thi ma ne to notice nahi kiya lakin mere 1 dost ne notice kiya iss ne sab ko bataya. Ma ne phr bas isi waqat se ise daikhna suru kr diya. Bohat notice kiya ise is ne bohat baar smile b di. Who wahan apni family k sath aie hoi thi. Phr ma ne is k picha suru kiya jahan who jati wahin ma aa jata. Mere dost one kaha k kisi tara apna number de do. Phr muje 1 tarkeeb suji. Ma icecream wale k pass gaya or ise kr k bulya. Is ne apni family se kaha k who icecream le kr aati ha. Wahan ma ne apna number ise 1 kagaz par likh kr de diya or who chali gai. Agle din hum sab dost is k phone ka intzaar kerte rahe lakin koi nhai aya. Phr hum apne kamo ma masgool ho gaie.
Tuesday, September 16, 2014
Chudai Mammo ki
>>>>Click Here TO Fuck me<<< >>>>Click Here TO Fuck me<< >>>>Click Here TO Fuck me<<<< hi dosto! Kia hal hai apnay feed back k liay plz Story2017@gmail.com per zaror rabta krain. mera naam Saleem hai aur main Abbottabad ka rehnay wala houn. aj main apni aik anokhi kahani app se share krnay ja raha houn. Hua kuch youn k meri sister ko nursing ki job mili. aur us ki pehli appointment Battagram main hui. aur mujay us ko chornay Battagram jana para q k jaga b dohndni the aur saman b tha sath main. Meri sister ko married staff hostel main room mila. jb hum room main ponchay to puray hostel ki nurses uder jama ho gaye the q k aik to hum boht lamba safar kr k uder ponchay thay aur dosra un main aik new nurse ka
Biwi ki sexy behen ko choda
Mera naam Naveed hay aur may aaj kal lahore may as a government servant
grade 17 may
serve kar raha hun. May bohat mehnati aur lagun kay sath sarkari kam
karnay wala hun, meri
age iswaqt 27 yerars hay.lekin waqt kay sath sath thora sa badal gaya
hun. Bachpan may mujhay females may koi interest nahi thi aur ab
bhi as such nahi, lekin insan by nature bohat kore hota hay. May shadi
shuda hun aur meri
shadi ko iswaqt 1 year hogaye hain. Meri wife jo kay meri cousin (khala ki beti) hay by
nature bohat wafadar hay aur mera bohat khayal rakhnay wali hay
Wo iswaqt pregnant hay our likely coming january may bacha jan legi. May saab say bara bhai hun aur ghar ko look after
karnay wala, meri wife ka number behanoon may 3rd hay. Wife ki bari do behanain (Shagufta
age 38 aur Sofia 36) doctors hain aur bohat khayal rakhnay wali hain. Meray sath do
incidents paish aye jin may say aaj may aap ka sath sirf aik share karna chahta hun, dusra
apki pehlay kay pasand kay bad sunaonga, umeed hay kay yeh haqiqi stori apko pasand aayegi.
Jesa k may aapko pehlay bata chuka hun ka meri wife meri cousin hay aur bachpan say hamara
aana jana tha aur hay. Ye kahani jo may ab describe karnay laga hun, ka taluq doosri doctor
behan say hay jiska naam ‘Sobia’ hay, jo aab 3 bachoon ki maa hay. Is waqiye ki ibtida us
waqt hui jab may class 7th may tha i.e. 1997, aur Sobia bajee nay pehla beta jana tha, wo
apnay maikay aae hui thi, aur may bhi itifaq say sardiyoon ki chhutiyoon may unkay ghar gya
hua tha.
Saturday, May 11, 2013
तेरी याद साथ है-20
निक्कर निकलते ही मेरा मुन्ना बिल्कुल अकड़ कर फुफकारने लगा। प्रिया की
आँखें फ़ैल गईं और फिर उनमें वही चमक दिखने लगी जो कि पिछली रात को नज़र आई
थी। उसने झट से मेरे लंड को अपने हाथों में जकड़ लिया और झुक कर लंड के
सुपारे पर एक किस्सी कर दी। किस करते ही मेरे लंड ने उसे ठुनक कर सलाम किया
जिसे देख कर प्रिया के मुँह से हंसी निकल गई।
"शैतान...बड़ा मज़ा आ रहा है न... खूब ठनक रहे हो... अभी बताती हूँ।" प्रिया ने मेरे लंड को देखकर कहा मानो वो उससे ही बातें कर रही हो।
प्रिया ने मेरे लंड को एक बार फिर से अच्छी तरह से अपने हाथों से सहलाया और फिर मेरे अन्डकोशों को मुट्ठी में भर कर एक दो बार दबाया और मेरी तरफ देखने लगी।
मैंने उसकी आँखों में देख कर उससे आगे बढ़ने के लिए इशारा किया। प्रिया को पता था कि मैं क्या चाहता हूँ...
प्रिया ने फिर से रस वाली कटोरी उठाई और सारा का सारा रस मेरे लंड में ऐसे डालने लगी मानो नहला रही हो। मेरा लंड गुलाबजामुन के रस से सराबोर हो गया और उस गाढ़े रस की वजह से चमकने लगा। लंड की नसें रस से सराबोर होकर और भी उभर गईं थीं और मोटे से रस्से के सामान दिख रही थीं मानो रस्सियों से लंड को लपेट दिया हो।
प्रिया ने कटोरी को अलग रख दिया और अब मेरे दोनों जांघों के बीच अपने आप को स्थपित कर लिया। प्रिया के बाल अब तक खुले हुए थे, उसने अपने दोनों हाथों से अपने बालों को बाँध कर जूड़ा बना लिया ताकि लंड चूसते वक़्त वो उसे परेशान न करें।
प्रिया की समझदारी ने एक बार फिर से मेरा मन मोह लिया। जब वो अपने बाल ठीक कर रही थी मैंने अपने हाथों को बढ़ा कर उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया।
"उह्ह्ह्ह...तुम भी ना ! इतने जोर से कोई दबाता है क्या..." प्रिया ने चीख कर कहा।
"औरों का तो पता नहीं लेकिन मैं तो ऐसे ही दबाता हूँ !" मैंने उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरह खींचते हुए कहा और हंसने लगा।
"अच्छा जी...बड़ा मज़ा आता है मुझे दर्द देकर...?" प्रिया ने अपने हाथों को मेरे हाथों पर रखते हुए कहा और फिर मुस्कुराते हुए मेरे हाथों को हटा कर वापस से अपनी पोजीशन ठीक की और फिर झुकती चली गई।
प्रिया ने अपनी जीभ पूरी बाहर निकाल ली और मेरे टनटनाये लंड को बिना अपने हाथों से पकड़े जीभ की नोक से लंड को ऊपर से नीचे एक लम्बी सी दिशा में चलाया।
"ओह्ह... मेरी रानी... तुम लाजवाब हो !" मेरे मुँह से आह निकली और मैं तड़प उठा।
प्रिया ने वैसे ही बाहर से लंड के चारों तरफ लगे रस को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ किया और फिर लंड के अगले भाग को अपने होठों में भर लिया।
अब प्रिया ने अपना कमाल दिखाना शुरू किया और आइस क्रीम की तरह लंड को मज़े से चूसने लगी। हालांकि मेरे लंड को पूरा मुँह में लेना मुश्किल था लेकिन प्रिया पूरी कोशिश कर रही थी कि उसे जितना हो सके अपने मुँह में भर ले।
मैं मज़े से अपनी कमर को थोड़ा थोड़ा हिलाते हुए अपना लंड उसके मुँह में दे रहा था। मेरे मुँह से बस हल्की हल्की सिसकारियाँ ही निकल पा रही थीं... क्यूंकि जैसे ही मैं कुछ बोलने की सोचता, प्रिया पूरे लंड को मुँह में भर लेती और मेरी साँसें ही अटक जातीं।
"उम्म्म... हाँ... मेरी जान, तुम सच में कमाल हो... चूसो जान... और चूसो..." इस बार मैंने सांस रोक कर उससे कहा और अपने हाथ बढ़ा कर उसका सर पकड़ लिया।
प्रिया ने अपना मुँह थोड़ा अलग किया और अपनी जीभ फिर से निकाल कर मेरे अन्डकोशों को चाटने लगी। अभी तक उसने अपने हाथों को अलग ही कर रखा था, शायद इसलिए कि कहीं गुलाबजामुन के रस से उसके हाथ चिपचिप न हो जाएँ...
खैर अब तक उसने लंड और आस पास लगे सारे रस को चाट लिया था इसलिए अब उसने अपने दायें हाथ से मेरा लंड पकड़ा और खूब तेज़ी से लंड को हिलाने लगी जैसे कि मुठ मारते वक़्त किया जाता है। साथ ही साथ वो अपने होंठों के बीच मेरे अण्डों को पकड़ कर चुभला भी रही थी। कुल मिलकर ऐसी स्थिति थी कि मैं अपने पूरे होशोहवास खो रहा था। प्रिया की नाज़ुक हथेली और नाज़ुक होठों की मस्ती ने मुझे मस्त कर दिया था।
प्रिया ने अब मेरे लंड की तरफ अपने नज़रें उठाई और धीरे से मेरे लंड के चमड़े को खोलकर मेरा सुपारा बाहर किया। सुपारा अभी तक लाल हो चुका था और प्रिया के मुँह के रस से भीग कर चमक रहा था।
प्रिया ने अपने होंठों से खुले हुए सुपारे को चूमा और फिर से अपने हाथ को पीछे ले जा कर रस वाली कटोरी फिर से उठा लिया। अब तक सारा रस लगभग ख़त्म हो चुका था लेकिन फिर भी प्रिया ने अपनी उँगलियों से कटोरी के अन्दर का रस इकट्ठा किया और फिर लगभग 8-10 बूँदें सुपारे पर गिरा दीं। रस मेरे सुपारे के ठीक ऊपर मेरे लंड के छेद से होता हुआ चारो तरफ फ़ैल गया। अब सुपारा बहुत ही प्यारा दिख रहा था क्यूंकि उसके ऊपर रस की गाढ़ी सी परत चढ़ गई थी।
प्रिया ने एक खा जाने वाली नज़रों से लंड को देखा और फिर से अपनी जीभ को मेरे लंड के छेद पे रखा और धीरे धीरे जीभ की नोक को रगड़ा।
"उफफ्फ... आह प्रिया... ले लो पूरा अन्दर... ऐसे मत करो, गुदगुदी होती है..." मैं थोड़ा सा तड़प कर बोलने लगा।
"आप बस ऐसे ही लेटे रहो मेरे सरकार... मुझे जो करना है वो तो मैं करके ही रहूँगी !" प्रिया ने मुझे देखकर हंसते हुए कहा और वापस अपने काम में लग गई। उसने अपनी जीभ को सुपारे के चारों तरफ घुमा घुमा कर सारा रस चाट लिया और फिर अपना मुँह खोल कर पूरे सुपारे को मुँह में भर लिया।
फिर शुरू हुआ प्रिया का रफ़्तार भरा लंड चूसने का कार्यक्रम और उसने तेज़ी से लंड को पूरा निचोड़ डाला। मेरी तो साँसें ही रुकने लगी थीं। मैं बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाल रहा था। आज प्रिया मेरे लंड को तोड़ डालने के मूड में थी। उसने अब अपना एक हाथ भी लगा दिया और हाथ से हिलाते हुए लंड को चूसने लगी...
मैं अब काबू रखने की हालत में नहीं था, मैंने उसका सर पकड़ कर हटा दिया और उठ कर बैठ गया। अगर ऐसा नहीं करता तो शायद उसके मुँह में ही झड़ जाता। मैं बैठ कर लम्बी लम्बी साँसें लेने लगा और प्रिया मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूरने लगी।
मैंने अपनी साँसों को नियंत्रित किया और प्रिया को एक झटके से अपनी तरफ खींच लिया। प्रिया का फूल सा बदन मेरे ऊपर आ गया और मैंने उसे लिपटा कर नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके होंठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगा। मैंने उसकी चूचियों को बेदर्दी से पकड़ कर मसलना शुरू किया और अपने सांप को उसकी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। लण्ड और चूत दोनों इतने गीले थे कि अगर मैं कोशिश करता तो एक ही झटके में लंड अन्दर हो जाता लेकिन मुझे यह ख्याल था कि प्रिया अभी तक कुंवारी थी और मेरा लंड उसकी नाज़ुक चूत को फाड़ सकता था।
मुझे रिंकी वाली बात भी याद आ गई, मैंने रिस्क नहीं लिया और उसके ऊपर से उठ कर उसके पैरों की तरफ आ गया।
मैंने प्रिया की जांघों को अपने हाथों से सहलाया और फिर धीरे से उसके पैरों को ऊपर उठा कर अपने कंधे पर रख लिया। पैरों को उठाने की वजह से मेरा लंड अब उसकी चूत के ठीक मुहाने पर सैट हो गया और ठुनक ठुनक कर उसकी चूत को चूमने लगा।
मैंने भी अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी चूत की दरारों में घिसना शुरू किया और प्रिया की तरफ हसरत भरी नज़रों से देखने लगा।
प्रिया के चेहरे पर उत्तेजना के भाव दिख रहे थे साथ ही उसकी आँखों में एक अजीब सा डर नज़र आ रहा था। वो जानती थी कि अब असली काम होने वाला है और मेरा लम्बा चौड़ा लंड उसकी चूत की धज्जियाँ उड़ाने वाला था। प्रिया मेरी तरफ ऐसे देख रही थी मानो वो यह कहना चाह रही हो कि जो भी करना धीरे करना।
मैं उसकी हालत समझ रहा था, मैंने उसे प्यार से देखा।
"प्रिया मेरी रानी... घबराना नहीं... थोड़ा सा दर्द तो होगा लेकिन मैं ख्याल रखूँगा..." मैंने उसे समझाते हुए कहा।
"डर तो लग रहा है जान, लेकिन मैं अब बर्दाश्त नहीं कर सकती...तुम आगे बढ़ो, मैं संभाल लूंगी...!" प्रिया ने मुझे शरमाते हुए देख कर कहा।
मैंने उसकी जांघों को थम लिया और अपने सुपारे को उसकी नाज़ुक सी चूत के अन्दर दबाव के साथ घुसाने लगा। चिकनाई इतनी ज्यादा थी कि लंड बार बार फिसल जा रहा था। मैंने फ़िर से अपने लंड को पकड़ा और इस बार थोड़ा दम लगा कर लंड को ठेल दिया।
"आअह... सोनू... धीरे..." प्रिया की टूटती आवाज़ आई।
मैंने देखा कि सुपारे का अगला हिस्सा थोड़ा सा उसकी चूत में फंस गया था। अब अगले धक्के की बारी थी और मैंने फ़िर से एक हल्का धक्का मारा... लंड का सुपारा थोड़ा और अन्दर गया और आधा सुपारा उसकी चूत के मुँह में अटक गया।
प्रिया ने अपने दांत भींच लिए थे और अपनी मुट्ठी से चादर को पकड़ लिया था। मैं जानता था कि ज्यादा जोर जबरदस्ती करने से उसकी हालत ख़राब हो सकती है। मैंने अपने सुपारे को वैसे ही फंसा कर रगड़ना चालू किया और उसकी जांघों को सहलाता रहा।
प्रिया इंतज़ार में थी कि कब धक्का पड़ेगा और उसकी चूत फटेगी। उसकी मनोदशा साफ़ साफ़ दिख रही थी।
मैंने ऐसे ही रगड़ते रगड़ते सांस रोक ली और एक जोरदार सा धक्का मारा। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
"आई ईईईई ई ईईइ... मर गईईईईई..." प्रिया जोर से चीख पड़ी।
आधा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर जा चुका था। प्रिया की चीख ने मेरी गाण्ड फाड़ दी। मैं डर ही गया, वो तो भला हो मेरा कि मैंने दरवाज़े के साथ साथ खिडकियों को भी बंद कर दिया था। वरना उसकी चीख पूरे घर में फ़ैल जाती और सब जाग जाते।
मैंने तुरंत उसके जांघों को छोड़ कर उसके ऊपर झुक कर अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और उसका मुँह बंद कर दिया। लेकिन उसकी घुटी घुटी सी आवाज़ अब भी निकल रही थी। उसकी आँखें फैलकर चौड़ी हो गई थीं और उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा दिए।
मैंने सुन रखा था कि किसी कुंवारी लड़की की सील तोड़ते वक़्त उसका ध्यान बंटा दिया जाना चाहिए ताकि वो सब सह सके।
मैं भी उसी बात को ध्यान में रखकर उसके होंठों को चूमते हुए उसकी चूचियों को पकड़ कर सहलाता रहा। करीब 8-10 मिनट के बाद प्रिया की पकड़ मेरे पीठ से थोड़ी ढीली हुई और मैं समझ गया कि उसका दर्द कम हो रहा है।
मैं तब थोड़ा ऊपर उठा और एक बार फिर से उसकी जांघों को थाम कर अपने लंड को उतना ही घुसाकर धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।
जैसे ही लंड ने हरकत करनी शुरू की, प्रिया को फिर से दर्द का एहसास होने लगा।
"प्लीज सोनू... धीरे करो न... बहुत दर्द हो रहा है... उफ्फ्फ्फ़... अगर पता होता कि इतना दर्द होता है तो मैं कभी नहीं लेती अपनी चूत में तुम्हारा यह ज़ालिम लंड !" प्रिया दर्द से कराहते हुए हिल भी रही थी और मुझसे शिकायत भी कर रही थी।
मैंने मन में सोचा," अभी तो असली दर्द बाकी है मेरी जान...पता नहीं झेल पाओगी या नहीं।"
यह सोचते सोचते मैंने लंड को आगे पीछे करना और उसकी जाँघों को सहलाना जारी रखा। लंड की रगड़ ने चूत को पानी छोड़ने पर मजबूर कर दिया और उसकी चूत ने पानी छोड़ा। लंड चिकनाई को महसूस कर थोड़ा सा और आगे सरका।
"आआह्ह्ह... सोनू... सोनू... दुखता है..." प्रिया को फिर से दर्द का एहसास हुआ।
"बस मेरी जान...अब नहीं दुखेगा..." मैंने उसे सहलाते हुए कहा और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर उसकी एक चूची को पकड़ कर मसलने लगा।
चूचियों पर हाथ पड़ते ही प्रिया ने अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाया और मुझे यह इशारा मिला कि अब शायद उसे भी अच्छा लगने लगा था। मैं इसी मौके की तलाश में था, मैंने देरी करना उचित नहीं समझा और अपनी सांस को रोक कर उसकी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और झुक कर उसके होठों को अपने होठों से कैद कर लिया। मैं जानता था कि इस बार जो दर्द उसे होने वाला था वो उसकी हालत ख़राब कर देगा और वो जोर जोर से चिल्लाने लगेगी।
मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में अपने लंड को रगड़ते रगड़ते अचानक से एक भरपूर दम लगा कर जोरदार धक्का मारा और इस बार किला फ़तेह कर लिया।
"गगगगगूं... गगगगगगूं...उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह... !" प्रिया की घुटन मेरे मुँह में दब कर रह गई और उसने मेरे सर के बालों को इतनी जोर से खींचा कि मैं बर्दासश्त नहीं कर पाया और मेरे होंठ उसके होठों से अलग हो गए।
"ऊऊह्हह्ह ह्हह माँ... मुझे नहीं करना...निकालो...प्लीज...मर गईईईई..." प्रिया ने छूटते ही जोर से आवाज़ निकाली और मुझे धक्के देकर खुद से अलग करने लगी।
उसकी आँखें बाहर को आ गईं और उनमे आँसुओं की मोटी मोटी बूँदें भर गईं। उसके होंठ थरथराने लगे... लेकिन कोई शब्द ही नहीं निकल रहे थे मानो उसका गला ही बंद हो गया हो।
उसने अपनी गर्दन इधर उधर करके अपने बेइंतेहा दर्द का प्रमाण दिया और मुझे निरंतर अलग करने के लिए धक्के देती रही।
मैंने उसका चेहरा अपनी हथेलियों में लिया और उसके आँखों को चूमकर बोला,"बस प्रिया... यह आखिरी दर्द था... थोड़ा सा सह लो... अब सब कुछ ठीक हो जायेगा... अब तो बस मज़े ही मज़े हैं।"
"नहीं सोनू... प्लीज मेरी बात मान लो... बहुत दुःख रहा है... आईई... ओह्ह्ह्हह्ह माँ... मुझसे नहीं होगा..." प्रिया ने लड़खड़ाती आवाज़ में मुझसे कहा और मुझसे लिपट कर रोने लगी।
मैं थोड़ा घबरा गया लेकिन अपने आपको संभाल कर मैंने उसके होंठों को एक बार फिर से चूसना शुरू किया और साथ ही साथ उसकी चूचियों को भी फिर से मसलना शुरू किया।
लंड अब भी पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसा हुआ था और ऐसा लग रहा था मानो किसी ने जोर से मुट्ठी में जकड़ रखा हो। मैं बिल्कुल भी हिले बिना उसके होठों और उसकी चूचियों से खेलता रहा और अपने बदन से उसके बदन को धीरे धीरे रगड़ता रहा।
लगभग 15 मिनट के बाद प्रिया ने मेरे होठों को अपने होठों से चूसना शुरू किया और अपने हाथों को मेरे पीठ पर ले जा कर मुझे सहलाने लगी। धीरे धीरे उसने अपनी कमर को थोड़ी सी हरकत दी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ किया।
मैं उसका इशारा समझ चुका था और मैंने उसकी आँखों में देखकर मुस्कान भरी और अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर किया। लंड थोड़ा सा बाहर आया, लंड के बाहर आते ही मुझे कुछ गरम गरम सा तरल पदार्थ अपने लंड से होकर बाहर आता महसूस हुआ। मैंने उत्सुकतावश अपना सर नीचे करके देखा तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं। मैंने देखा कि खून की एक मोटी सी धार प्रिया की चूत से निकल रही थी और निकल कर मेरे लंड से होते हुए नीचे बिछी चादर पर फ़ैल रही थी।
प्रिया को भी शायद कुछ महसूस हुआ होगा तभी उसने अपने पैरों को हिलाकर कुछ समझने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे कोई मौका नहीं दिया।
अगर उसने वो देख लिया होता तो निश्चित ही मुझे खुद से अलग कर देती और चोदने भी नहीं देती।
मैंने बिना वक़्त गवाए अपने लंड को बाहर खींच कर फिर से एक धक्का मार कर अन्दर ठेल दिया।
फच्च ...एक आवाज़ आई और मेरा लंड वापस उसकी चूत की गहराइयों में चला गया और प्रिया के मुँह से फिर से एक सिसकारी निकली।
कहानी जारी रहेगी।
sonu.jsr4u@gmail.com
"शैतान...बड़ा मज़ा आ रहा है न... खूब ठनक रहे हो... अभी बताती हूँ।" प्रिया ने मेरे लंड को देखकर कहा मानो वो उससे ही बातें कर रही हो।
प्रिया ने मेरे लंड को एक बार फिर से अच्छी तरह से अपने हाथों से सहलाया और फिर मेरे अन्डकोशों को मुट्ठी में भर कर एक दो बार दबाया और मेरी तरफ देखने लगी।
मैंने उसकी आँखों में देख कर उससे आगे बढ़ने के लिए इशारा किया। प्रिया को पता था कि मैं क्या चाहता हूँ...
प्रिया ने फिर से रस वाली कटोरी उठाई और सारा का सारा रस मेरे लंड में ऐसे डालने लगी मानो नहला रही हो। मेरा लंड गुलाबजामुन के रस से सराबोर हो गया और उस गाढ़े रस की वजह से चमकने लगा। लंड की नसें रस से सराबोर होकर और भी उभर गईं थीं और मोटे से रस्से के सामान दिख रही थीं मानो रस्सियों से लंड को लपेट दिया हो।
प्रिया ने कटोरी को अलग रख दिया और अब मेरे दोनों जांघों के बीच अपने आप को स्थपित कर लिया। प्रिया के बाल अब तक खुले हुए थे, उसने अपने दोनों हाथों से अपने बालों को बाँध कर जूड़ा बना लिया ताकि लंड चूसते वक़्त वो उसे परेशान न करें।
प्रिया की समझदारी ने एक बार फिर से मेरा मन मोह लिया। जब वो अपने बाल ठीक कर रही थी मैंने अपने हाथों को बढ़ा कर उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया।
"उह्ह्ह्ह...तुम भी ना ! इतने जोर से कोई दबाता है क्या..." प्रिया ने चीख कर कहा।
"औरों का तो पता नहीं लेकिन मैं तो ऐसे ही दबाता हूँ !" मैंने उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरह खींचते हुए कहा और हंसने लगा।
"अच्छा जी...बड़ा मज़ा आता है मुझे दर्द देकर...?" प्रिया ने अपने हाथों को मेरे हाथों पर रखते हुए कहा और फिर मुस्कुराते हुए मेरे हाथों को हटा कर वापस से अपनी पोजीशन ठीक की और फिर झुकती चली गई।
प्रिया ने अपनी जीभ पूरी बाहर निकाल ली और मेरे टनटनाये लंड को बिना अपने हाथों से पकड़े जीभ की नोक से लंड को ऊपर से नीचे एक लम्बी सी दिशा में चलाया।
"ओह्ह... मेरी रानी... तुम लाजवाब हो !" मेरे मुँह से आह निकली और मैं तड़प उठा।
प्रिया ने वैसे ही बाहर से लंड के चारों तरफ लगे रस को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ किया और फिर लंड के अगले भाग को अपने होठों में भर लिया।
अब प्रिया ने अपना कमाल दिखाना शुरू किया और आइस क्रीम की तरह लंड को मज़े से चूसने लगी। हालांकि मेरे लंड को पूरा मुँह में लेना मुश्किल था लेकिन प्रिया पूरी कोशिश कर रही थी कि उसे जितना हो सके अपने मुँह में भर ले।
मैं मज़े से अपनी कमर को थोड़ा थोड़ा हिलाते हुए अपना लंड उसके मुँह में दे रहा था। मेरे मुँह से बस हल्की हल्की सिसकारियाँ ही निकल पा रही थीं... क्यूंकि जैसे ही मैं कुछ बोलने की सोचता, प्रिया पूरे लंड को मुँह में भर लेती और मेरी साँसें ही अटक जातीं।
"उम्म्म... हाँ... मेरी जान, तुम सच में कमाल हो... चूसो जान... और चूसो..." इस बार मैंने सांस रोक कर उससे कहा और अपने हाथ बढ़ा कर उसका सर पकड़ लिया।
प्रिया ने अपना मुँह थोड़ा अलग किया और अपनी जीभ फिर से निकाल कर मेरे अन्डकोशों को चाटने लगी। अभी तक उसने अपने हाथों को अलग ही कर रखा था, शायद इसलिए कि कहीं गुलाबजामुन के रस से उसके हाथ चिपचिप न हो जाएँ...
खैर अब तक उसने लंड और आस पास लगे सारे रस को चाट लिया था इसलिए अब उसने अपने दायें हाथ से मेरा लंड पकड़ा और खूब तेज़ी से लंड को हिलाने लगी जैसे कि मुठ मारते वक़्त किया जाता है। साथ ही साथ वो अपने होंठों के बीच मेरे अण्डों को पकड़ कर चुभला भी रही थी। कुल मिलकर ऐसी स्थिति थी कि मैं अपने पूरे होशोहवास खो रहा था। प्रिया की नाज़ुक हथेली और नाज़ुक होठों की मस्ती ने मुझे मस्त कर दिया था।
प्रिया ने अब मेरे लंड की तरफ अपने नज़रें उठाई और धीरे से मेरे लंड के चमड़े को खोलकर मेरा सुपारा बाहर किया। सुपारा अभी तक लाल हो चुका था और प्रिया के मुँह के रस से भीग कर चमक रहा था।
प्रिया ने अपने होंठों से खुले हुए सुपारे को चूमा और फिर से अपने हाथ को पीछे ले जा कर रस वाली कटोरी फिर से उठा लिया। अब तक सारा रस लगभग ख़त्म हो चुका था लेकिन फिर भी प्रिया ने अपनी उँगलियों से कटोरी के अन्दर का रस इकट्ठा किया और फिर लगभग 8-10 बूँदें सुपारे पर गिरा दीं। रस मेरे सुपारे के ठीक ऊपर मेरे लंड के छेद से होता हुआ चारो तरफ फ़ैल गया। अब सुपारा बहुत ही प्यारा दिख रहा था क्यूंकि उसके ऊपर रस की गाढ़ी सी परत चढ़ गई थी।
प्रिया ने एक खा जाने वाली नज़रों से लंड को देखा और फिर से अपनी जीभ को मेरे लंड के छेद पे रखा और धीरे धीरे जीभ की नोक को रगड़ा।
"उफफ्फ... आह प्रिया... ले लो पूरा अन्दर... ऐसे मत करो, गुदगुदी होती है..." मैं थोड़ा सा तड़प कर बोलने लगा।
"आप बस ऐसे ही लेटे रहो मेरे सरकार... मुझे जो करना है वो तो मैं करके ही रहूँगी !" प्रिया ने मुझे देखकर हंसते हुए कहा और वापस अपने काम में लग गई। उसने अपनी जीभ को सुपारे के चारों तरफ घुमा घुमा कर सारा रस चाट लिया और फिर अपना मुँह खोल कर पूरे सुपारे को मुँह में भर लिया।
फिर शुरू हुआ प्रिया का रफ़्तार भरा लंड चूसने का कार्यक्रम और उसने तेज़ी से लंड को पूरा निचोड़ डाला। मेरी तो साँसें ही रुकने लगी थीं। मैं बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाल रहा था। आज प्रिया मेरे लंड को तोड़ डालने के मूड में थी। उसने अब अपना एक हाथ भी लगा दिया और हाथ से हिलाते हुए लंड को चूसने लगी...
मैं अब काबू रखने की हालत में नहीं था, मैंने उसका सर पकड़ कर हटा दिया और उठ कर बैठ गया। अगर ऐसा नहीं करता तो शायद उसके मुँह में ही झड़ जाता। मैं बैठ कर लम्बी लम्बी साँसें लेने लगा और प्रिया मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूरने लगी।
मैंने अपनी साँसों को नियंत्रित किया और प्रिया को एक झटके से अपनी तरफ खींच लिया। प्रिया का फूल सा बदन मेरे ऊपर आ गया और मैंने उसे लिपटा कर नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके होंठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगा। मैंने उसकी चूचियों को बेदर्दी से पकड़ कर मसलना शुरू किया और अपने सांप को उसकी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। लण्ड और चूत दोनों इतने गीले थे कि अगर मैं कोशिश करता तो एक ही झटके में लंड अन्दर हो जाता लेकिन मुझे यह ख्याल था कि प्रिया अभी तक कुंवारी थी और मेरा लंड उसकी नाज़ुक चूत को फाड़ सकता था।
मुझे रिंकी वाली बात भी याद आ गई, मैंने रिस्क नहीं लिया और उसके ऊपर से उठ कर उसके पैरों की तरफ आ गया।
मैंने प्रिया की जांघों को अपने हाथों से सहलाया और फिर धीरे से उसके पैरों को ऊपर उठा कर अपने कंधे पर रख लिया। पैरों को उठाने की वजह से मेरा लंड अब उसकी चूत के ठीक मुहाने पर सैट हो गया और ठुनक ठुनक कर उसकी चूत को चूमने लगा।
मैंने भी अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी चूत की दरारों में घिसना शुरू किया और प्रिया की तरफ हसरत भरी नज़रों से देखने लगा।
प्रिया के चेहरे पर उत्तेजना के भाव दिख रहे थे साथ ही उसकी आँखों में एक अजीब सा डर नज़र आ रहा था। वो जानती थी कि अब असली काम होने वाला है और मेरा लम्बा चौड़ा लंड उसकी चूत की धज्जियाँ उड़ाने वाला था। प्रिया मेरी तरफ ऐसे देख रही थी मानो वो यह कहना चाह रही हो कि जो भी करना धीरे करना।
मैं उसकी हालत समझ रहा था, मैंने उसे प्यार से देखा।
"प्रिया मेरी रानी... घबराना नहीं... थोड़ा सा दर्द तो होगा लेकिन मैं ख्याल रखूँगा..." मैंने उसे समझाते हुए कहा।
"डर तो लग रहा है जान, लेकिन मैं अब बर्दाश्त नहीं कर सकती...तुम आगे बढ़ो, मैं संभाल लूंगी...!" प्रिया ने मुझे शरमाते हुए देख कर कहा।
मैंने उसकी जांघों को थम लिया और अपने सुपारे को उसकी नाज़ुक सी चूत के अन्दर दबाव के साथ घुसाने लगा। चिकनाई इतनी ज्यादा थी कि लंड बार बार फिसल जा रहा था। मैंने फ़िर से अपने लंड को पकड़ा और इस बार थोड़ा दम लगा कर लंड को ठेल दिया।
"आअह... सोनू... धीरे..." प्रिया की टूटती आवाज़ आई।
मैंने देखा कि सुपारे का अगला हिस्सा थोड़ा सा उसकी चूत में फंस गया था। अब अगले धक्के की बारी थी और मैंने फ़िर से एक हल्का धक्का मारा... लंड का सुपारा थोड़ा और अन्दर गया और आधा सुपारा उसकी चूत के मुँह में अटक गया।
प्रिया ने अपने दांत भींच लिए थे और अपनी मुट्ठी से चादर को पकड़ लिया था। मैं जानता था कि ज्यादा जोर जबरदस्ती करने से उसकी हालत ख़राब हो सकती है। मैंने अपने सुपारे को वैसे ही फंसा कर रगड़ना चालू किया और उसकी जांघों को सहलाता रहा।
प्रिया इंतज़ार में थी कि कब धक्का पड़ेगा और उसकी चूत फटेगी। उसकी मनोदशा साफ़ साफ़ दिख रही थी।
मैंने ऐसे ही रगड़ते रगड़ते सांस रोक ली और एक जोरदार सा धक्का मारा। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
"आई ईईईई ई ईईइ... मर गईईईईई..." प्रिया जोर से चीख पड़ी।
आधा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर जा चुका था। प्रिया की चीख ने मेरी गाण्ड फाड़ दी। मैं डर ही गया, वो तो भला हो मेरा कि मैंने दरवाज़े के साथ साथ खिडकियों को भी बंद कर दिया था। वरना उसकी चीख पूरे घर में फ़ैल जाती और सब जाग जाते।
मैंने तुरंत उसके जांघों को छोड़ कर उसके ऊपर झुक कर अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और उसका मुँह बंद कर दिया। लेकिन उसकी घुटी घुटी सी आवाज़ अब भी निकल रही थी। उसकी आँखें फैलकर चौड़ी हो गई थीं और उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा दिए।
मैंने सुन रखा था कि किसी कुंवारी लड़की की सील तोड़ते वक़्त उसका ध्यान बंटा दिया जाना चाहिए ताकि वो सब सह सके।
मैं भी उसी बात को ध्यान में रखकर उसके होंठों को चूमते हुए उसकी चूचियों को पकड़ कर सहलाता रहा। करीब 8-10 मिनट के बाद प्रिया की पकड़ मेरे पीठ से थोड़ी ढीली हुई और मैं समझ गया कि उसका दर्द कम हो रहा है।
मैं तब थोड़ा ऊपर उठा और एक बार फिर से उसकी जांघों को थाम कर अपने लंड को उतना ही घुसाकर धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।
जैसे ही लंड ने हरकत करनी शुरू की, प्रिया को फिर से दर्द का एहसास होने लगा।
"प्लीज सोनू... धीरे करो न... बहुत दर्द हो रहा है... उफ्फ्फ्फ़... अगर पता होता कि इतना दर्द होता है तो मैं कभी नहीं लेती अपनी चूत में तुम्हारा यह ज़ालिम लंड !" प्रिया दर्द से कराहते हुए हिल भी रही थी और मुझसे शिकायत भी कर रही थी।
मैंने मन में सोचा," अभी तो असली दर्द बाकी है मेरी जान...पता नहीं झेल पाओगी या नहीं।"
यह सोचते सोचते मैंने लंड को आगे पीछे करना और उसकी जाँघों को सहलाना जारी रखा। लंड की रगड़ ने चूत को पानी छोड़ने पर मजबूर कर दिया और उसकी चूत ने पानी छोड़ा। लंड चिकनाई को महसूस कर थोड़ा सा और आगे सरका।
"आआह्ह्ह... सोनू... सोनू... दुखता है..." प्रिया को फिर से दर्द का एहसास हुआ।
"बस मेरी जान...अब नहीं दुखेगा..." मैंने उसे सहलाते हुए कहा और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर उसकी एक चूची को पकड़ कर मसलने लगा।
चूचियों पर हाथ पड़ते ही प्रिया ने अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाया और मुझे यह इशारा मिला कि अब शायद उसे भी अच्छा लगने लगा था। मैं इसी मौके की तलाश में था, मैंने देरी करना उचित नहीं समझा और अपनी सांस को रोक कर उसकी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और झुक कर उसके होठों को अपने होठों से कैद कर लिया। मैं जानता था कि इस बार जो दर्द उसे होने वाला था वो उसकी हालत ख़राब कर देगा और वो जोर जोर से चिल्लाने लगेगी।
मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में अपने लंड को रगड़ते रगड़ते अचानक से एक भरपूर दम लगा कर जोरदार धक्का मारा और इस बार किला फ़तेह कर लिया।
"गगगगगूं... गगगगगगूं...उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह... !" प्रिया की घुटन मेरे मुँह में दब कर रह गई और उसने मेरे सर के बालों को इतनी जोर से खींचा कि मैं बर्दासश्त नहीं कर पाया और मेरे होंठ उसके होठों से अलग हो गए।
"ऊऊह्हह्ह ह्हह माँ... मुझे नहीं करना...निकालो...प्लीज...मर गईईईई..." प्रिया ने छूटते ही जोर से आवाज़ निकाली और मुझे धक्के देकर खुद से अलग करने लगी।
उसकी आँखें बाहर को आ गईं और उनमे आँसुओं की मोटी मोटी बूँदें भर गईं। उसके होंठ थरथराने लगे... लेकिन कोई शब्द ही नहीं निकल रहे थे मानो उसका गला ही बंद हो गया हो।
उसने अपनी गर्दन इधर उधर करके अपने बेइंतेहा दर्द का प्रमाण दिया और मुझे निरंतर अलग करने के लिए धक्के देती रही।
मैंने उसका चेहरा अपनी हथेलियों में लिया और उसके आँखों को चूमकर बोला,"बस प्रिया... यह आखिरी दर्द था... थोड़ा सा सह लो... अब सब कुछ ठीक हो जायेगा... अब तो बस मज़े ही मज़े हैं।"
"नहीं सोनू... प्लीज मेरी बात मान लो... बहुत दुःख रहा है... आईई... ओह्ह्ह्हह्ह माँ... मुझसे नहीं होगा..." प्रिया ने लड़खड़ाती आवाज़ में मुझसे कहा और मुझसे लिपट कर रोने लगी।
मैं थोड़ा घबरा गया लेकिन अपने आपको संभाल कर मैंने उसके होंठों को एक बार फिर से चूसना शुरू किया और साथ ही साथ उसकी चूचियों को भी फिर से मसलना शुरू किया।
लंड अब भी पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसा हुआ था और ऐसा लग रहा था मानो किसी ने जोर से मुट्ठी में जकड़ रखा हो। मैं बिल्कुल भी हिले बिना उसके होठों और उसकी चूचियों से खेलता रहा और अपने बदन से उसके बदन को धीरे धीरे रगड़ता रहा।
लगभग 15 मिनट के बाद प्रिया ने मेरे होठों को अपने होठों से चूसना शुरू किया और अपने हाथों को मेरे पीठ पर ले जा कर मुझे सहलाने लगी। धीरे धीरे उसने अपनी कमर को थोड़ी सी हरकत दी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ किया।
मैं उसका इशारा समझ चुका था और मैंने उसकी आँखों में देखकर मुस्कान भरी और अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर किया। लंड थोड़ा सा बाहर आया, लंड के बाहर आते ही मुझे कुछ गरम गरम सा तरल पदार्थ अपने लंड से होकर बाहर आता महसूस हुआ। मैंने उत्सुकतावश अपना सर नीचे करके देखा तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं। मैंने देखा कि खून की एक मोटी सी धार प्रिया की चूत से निकल रही थी और निकल कर मेरे लंड से होते हुए नीचे बिछी चादर पर फ़ैल रही थी।
प्रिया को भी शायद कुछ महसूस हुआ होगा तभी उसने अपने पैरों को हिलाकर कुछ समझने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे कोई मौका नहीं दिया।
अगर उसने वो देख लिया होता तो निश्चित ही मुझे खुद से अलग कर देती और चोदने भी नहीं देती।
मैंने बिना वक़्त गवाए अपने लंड को बाहर खींच कर फिर से एक धक्का मार कर अन्दर ठेल दिया।
फच्च ...एक आवाज़ आई और मेरा लंड वापस उसकी चूत की गहराइयों में चला गया और प्रिया के मुँह से फिर से एक सिसकारी निकली।
कहानी जारी रहेगी।
sonu.jsr4u@gmail.com
Friday, May 3, 2013
Kuch Yun Khoee Maine Virginity Pune Me
Hello my lovely friends...I am saomya..Ye mere pehale story
hai...Desi kahani mai..Maine almost sab he stories padhe hai..Aur bahot
maje kiye hai.. Tu maine socha kyu naa apna 1st experiereance share
karun. Ye mere 100% real story hai..Ke kaise mainea......Virginity khoo
de pune me aake..Tu frnds koee galti hu jaae tu maaf karna..Mai abhe 20
years ke hoon..Rang goora. Figure 36-28-38 hai.. Mera hometown kolhapur
..Aur mai pune me padne aee hun..Mai pune ke bhartividyapeeth me enng karti hun..Tu frnds mai seedha Apne story pe aate hun..Meko pune me aake 1-2 months hue the ke..Sabse frndshp hu gayee..Hamare 1 acha group ban gaya college me..Jis me ladke bhe the..Hum aise e frnds.. The...Dheere dheere meko 1 ladka jiska naam Ashay tha..Uss pe crush aane laga..Wo bahot helpingg nature ka tha..N bahot gud luckng tha ..Next month uska b'day aane wala tha..Tu maine soca ye hee Mouka hai. Aksay ko prapose karne ka..Tu maine soch liya..N thaan Bhee liya..Tu maine 12baje wish kiya..Wo bahot khush hua...Maine usse akshay mujhse tumse 1 bahot jaruri baat karne hai,,tu bola..Bata...Maine bola Mujhe shram aate hai...
Fir maine use bola..Mai 1 min ke baad fon rakhonge..N msg bhejunge...Ge..Jiska reply tum mujhe kal collg me akele me duge..Tu wo maan gaya..Maine prapose kiya..N soo gaye..N pray karne lage kal haan he jawab mile..Next Day colg me akshay dekha..Mai usse dur-dur bhaag rahe the..Fir usne msg kiya..Collg ke baad Mai tumhe leene auunga..Hum bahar jaenge..Maine kaha thick hai..Wo collg ke baad mere hostel ke neeche aaya..N meko bike pe leke gaya..N wo meko Lavasa leke gaya..Wahan 1 point hai usne apne bike khade kare...Wahan usne apna jawab diya,,ke i lovvveeee u 2 jaan...Is din ka Mai kabse wai8..Kar raha thaa...N usne meko kiss kiyaa...Maine bheee usse lip kiss diya.....N lip kissing rahe..Woowwww 1st kiss omy lif...Wo mere Lip ko chusta raha....Oowwwwwowww..Mere haath..Uske kamar pe the...Fir dheere dhere uske haath mere top ke andar gaye..Mai aaaaa...Aaaaa.. Muhaaaaaaa...Ke awazien nikal rahe theeee.....
Fir usne mujse kaha..Tum mere zindagi hu...Ajj mera sabse achaa b'day hai...Jaan i luvvvv u muchhhhhhh...Mai kaha luvv u 2 much....Aur fir 1 zordaar Kisssssss....Wowwwww a longgg kissss.Hootho pe hooth....Jeeb pe jeeb....Rellyy...Exicted....Usne kaha jaan..Ab chalna huga..Tumhare hostel ka gate band hu Jaega...Man tu dono ka nai t Par situation ko dekh k..Hum wahan se nikle..Aur lavasa se pune aane tak..Mai usse chipak ke baithe the...Wowww wat a ride...Lovelllyyyy..Den usne Mujhe hostel ke gate par choda..N chala gaya...Den 12 baje uska fon aaya..Jaan m missig u...Louvvv u yaar....Uummhzzzz ummhaaaaa....Maine bola luv u 2......Jaan...Den hamne sex chat ke...N thakhe hune ke karan soo gaye...Den aise he colg milna julna chalta raha....Den karib 1 month ke baad uska fon aaya..Ke Jaan mere dono flat mates,,..Yaani room mate 2-4 dino ke liye ghar jaa rahe hai,...Tu tum aa jaooo..Jaan..Mai bahot excited the..Lavasan jaane ke Baad..Isliye..Maan gaye..Den next day wo mere hostel aaya..Meko lene.. Hum log uske flat pe gayee...Usne meko andar welcum kiya...N jaise door band kiya,,..Hum dono hamesha ke tarah 1 lambiii lip kiss me lag gaye,,..
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